॥ 100% निःस्वार्थ सनातन सेवा प्रकल्प ॥

सनातन संस्कृति संवर्धन, वैदिक चेतना एवं धर्म रक्षा

श्री द्वारकाधीश श्री जी फाउंडेशन किसी भी प्रकार का आर्थिक चंदा अथवा सार्वजनिक दान स्वीकार नहीं करता है। संस्था के समस्त पावन प्रकल्प पूर्णतः स्व-संचालित, निष्काम सेवा-भाव एवं ईश्वर-समर्पण के आधार पर निरंतर गतिमान हैं।

प्रकल्प ०१ • भव्य मन्दिर निर्माण

24 श्री लक्ष्मीनारायण मन्दिर निर्माण महासंकल्प

संकल्प वर्ष: 2018 महायज्ञ श्रृंखला वर्ष: 06 महापूर्णाहुति: 2041

वैदिक संस्कृति की पुनर्स्थापना, भक्तिमय वातावरण के सृजन तथा समाज में सात्विक ऊर्जा के संचार हेतु फाउंडेशन द्वारा 24 भव्य श्री लक्ष्मीनारायण मन्दिरों के निर्माण का पावन संकल्प लिया गया है।

यह सम्पूर्ण धार्मिक व सामाजिक अभियान बिना किसी बाहरी आर्थिक सहायता के, पूर्णतः स्व-प्रेरित एवं समर्पित भाव से क्रियान्वित किया जा रहा है।

मन्दिरों के माध्यम से नित्य वेद-पाठ, भजन-कीर्तन, आध्यात्मिक मार्गदर्शन तथा दीन-दुखियों की निःस्वार्थ सेवा को निरंतर सुदृढ़ किया जा रहा है।

श्री लक्ष्मीनारायण मन्दिर निर्माण प्रकल्प
प्रकल्प ०२ • विश्व शांति एवं शुद्धि

24 वर्षीय श्री गायत्री महायज्ञ संकल्प

संकल्प वर्ष: 2018 महायज्ञ श्रृंखला वर्ष: 06 महापूर्णाहुति: 2041

समस्त सृष्टि में सकारात्मक ऊर्जा के विस्तार, सूक्ष्म वातावरण के परिशोधन तथा जन-मानस में आत्मिक शांति की जागृति हेतु निरंतर 24 वर्षों तक चलने वाली श्री गायत्री महायज्ञ श्रृंखला का आयोजन किया जा रहा है।

यज्ञीय जीवन पद्धति भारतीय ऋषि परंपरा का आधार है। महायज्ञ में समर्पित पावन आहुतियाँ पर्यावरण को शुद्ध करती हैं और अंतःकरण में सात्विक सद्गुणों का पोषण करती हैं।

यह महायज्ञ बिना किसी व्यक्तिगत स्वार्थ अथवा आर्थिक संकलन के, समष्टि कल्याण की मंगलकामना के साथ नियमित रूप से आयोजित होता है।

श्री गायत्री महायज्ञ झलक

100% निःस्वार्थ सेवा नीति

फाउंडेशन किसी भी व्यक्ति अथवा संस्था से किसी भी रूप में कोई चंदा अथवा दान स्वीकार नहीं करता—समस्त सेवा कार्य पूर्णतः निष्काम हैं।

वैदिक ऋषि परंपरा

प्राचीन यज्ञ संस्कृति, वेदों का स्वाध्याय और मन्दिर निर्माण के माध्यम से सनातन गौरव का दीर्घकालिक संरक्षण।

व्यापक लोक-कल्याण

पीड़ित मानवता की सेवा, गौ-संवर्धन एवं समाज में सकारात्मक और नैतिक विचारों के विस्तार हेतु अटूट निष्ठा।