About SDSJ Foundation
श्री द्वारकाधीश श्री जी फाउंडेशन — 100% निःस्वार्थ सेवा, सनातन धर्म रक्षा एवं लोक कल्याण
Protecting Sanatan Values & Selfless Public Welfare
श्री द्वारकाधीश श्री जी फाउंडेशन (SDSJ Foundation) की स्थापना सनातन संस्कृति के संरक्षण, संवर्धन और समग्र मानव समाज के निःस्वार्थ कल्याण हेतु की गई है। फाउंडेशन का उद्देश्य वैदिक ज्ञान, आध्यात्मिक चेतना और सेवा के माध्यम से समाज में सकारात्मक चेतना का संचार करना है।
फाउंडेशन निरंतर महायज्ञों, मंदिर निर्माण, गुरुकुल शिक्षा, निःशुल्क मार्गदर्शन और दीन-दुखियों की सेवा के माध्यम से भारतीय आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक धरोहर को सशक्त बना रहा है।
।। ॐ सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामयाः । सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चिद्दुःखभाग्भवेत् ।।
प्रमुख आध्यात्मिक एवं सेवा संकल्प
फाउंडेशन के अंतर्गत संचालित दीर्घकालिक ईश्वरीय एवं सामाजिक प्रकल्प (100% स्व-संचालित)
24 श्री लक्ष्मीनारायण मन्दिर निर्माण
सनातन संस्कृति एवं भक्ति की प्रतिष्ठा हेतु 24 भव्य श्री लक्ष्मीनारायण मन्दिरों के निर्माण का पावन संकल्प (संकल्प वर्ष: 2018 | महापूर्णाहुति वर्ष: 2041)। यह प्रकल्प फाउंडेशन द्वारा पूर्णतः स्व-संचालित है।
24 वर्षीय पंच कुंडीय महायज्ञ
विश्व शांति, पर्यावरण शुद्धि एवं लोक कल्याण के उद्देश्य से निरंतर 24 वर्षों तक चलने वाली पंच कुंडीय श्री गायत्री महायज्ञ श्रृंखला का निःशुल्क एवं पावन संचालन।
शिक्षा एवं युवा मार्गदर्शन
गुरुकुल शिक्षा पद्धति, वैदिक अध्ययन और युवाओं को चरित्रवान व स्वावलंबी बनाने के लिए निरंतर मार्गदर्शन एवं निःशुल्क प्रेरणा सत्र।
हमारा ध्येय एवं उद्देश्य
- सनातन धर्म के प्राचीन मूल्यों और वैदिक संस्कृति का निःस्वार्थ प्रचार-प्रसार।
- नियमित यज्ञ, अनुष्ठान और साधना शिविरों का पूर्णतः निःशुल्क आयोजन।
- निर्धन, असहाय और जरूरतमंद वर्ग के लिए निरंतर निःस्वार्थ अन्न सेवा।
- गौ संरक्षण, पर्यावरण संवर्धन और प्राकृतिक जीवन शैली को प्रोत्साहन।
- बिना किसी चंदे या आर्थिक लाभ के 100% समाज-कल्याण की भावना।
धर्म एवं जन-कल्याण हेतु विचार (Idea)
हम किसी से कोई रुपया या दान (Donation) नहीं लेते हैं।
यदि आपके पास सनातन धर्म, संस्कृति या व्यापक लोक-कल्याण से संबंधित कोई ऐसा उपयोगी विचार (Idea) है जिससे समाज के बहुत से लोगों का हित हो सके, तो ही कृपया हमारे WhatsApp पर संपर्क करें।