श्री द्वारकाधीश श्री जी फाउंडेशन
सनातन धर्मोत्थान, वैदिक चेतना एवं 100% स्व-वित्तपोषित निःस्वार्थ सेवा प्रकल्प
वैदिक मर्यादा, ईश्वरीय साधना एवं लोक-कल्याण का पावन संकल्प
श्री द्वारकाधीश श्री जी फाउंडेशन की नींव सनातन संस्कृति के मूल सिद्धांतों—धर्म, सेवा, त्याग और समष्टि कल्याण—को पुनः स्थापित करने हेतु रखी गई है। फाउंडेशन का दृढ़ विश्वास है कि वास्तविक धर्म सेवा बिना किसी आर्थिक अपेक्षा अथवा सार्वजनिक चंदे के ही पूर्णतः सात्विक रह सकती है।
हमारे सभी प्रकल्प—24 भव्य धामों का निर्माण, 24 वर्षीय अखंड महायज्ञ, वैदिक गुरुकुल व्यवस्था एवं नित्य अन्नक्षेत्र—पूर्णतः आंतरिक संसाधनों एवं निःस्वार्थ भाव से संचालित हैं।
।। ॐ सह नाववतु । सह नौ भुनक्तु । सह वीर्यं करवावहै । तेजस्वि नावधीतमस्तु मा विद्विषावहै ।।
फाउंडेशन के प्रमुख 3 आध्यात्मिक एवं सामाजिक प्रकल्प
100% स्व-संचालित एवं जनकल्याण हेतु समर्पित दीर्घकालिक संकल्प
24 लक्ष्मीनारायण धाम निर्माण
सनातन संस्कृति, भक्ति और साधना की पुनर्जागृति हेतु 24 भव्य श्री लक्ष्मीनारायण मंदिरों की प्रतिष्ठा का संकल्प (2018–2041)। यह ईश्वरीय कार्य बिना किसी बाहरी दान के संपन्न हो रहा है।
24-वर्षीय पंच कुंडीय महायज्ञ
पर्यावरण परिशुद्धि, सकारात्मक ऊर्जा के विस्तार तथा विश्व-शांति हेतु निरंतर 24 वर्षों तक चलने वाली पंच कुंडीय गायत्री महायज्ञ श्रृंखला का पूर्णतः निःशुल्क आयोजन।
गुरुकुल चेतना एवं संस्कार
युवा पीढ़ी में चारित्रिक शुचिता, वैदिक अध्ययन, गौ-सेवा की भावना तथा उन्हें स्वावलंबी व राष्ट्र-समर्पित बनाने हेतु निरंतर मार्गदर्शन एवं प्रशिक्षण सत्र।
फाउंडेशन के मुख्य आदर्श एवं कार्यक्षेत्र
- सनातन संस्कृति एवं वैदिक ऋचाओं का निष्काम प्रचार-प्रसार।
- समाज के निर्धन एवं असहाय वर्ग हेतु नियमित निःस्वार्थ अन्न क्षेत्र।
- देसी गौवंश का संवर्धन, संरक्षण एवं प्राकृतिक चिकित्सा को बढ़ावा।
- सभी अनुष्ठानों और साधना शिविरों का आम जनमानस हेतु निःशुल्क संचालन।
- किसी भी प्रकार के व्यावसायिक लाभ या चंदे से 100% दूरी।
धर्म एवं समाज-हित हेतु सुझाव (Idea)
यदि आपके मस्तिष्क में सनातन धर्म, संस्कृति या व्यापक लोक-कल्याण के विस्तार हेतु कोई ऐसा अभिनव विचार (Idea) है जिससे समाज के बहुसंख्यक लोगों को वास्तविक लाभ पहुँच सके, तो अपना सुझाव हमारे आधिकारिक WhatsApp पर साझा करें।